बेटे की लापरवाही से गई युवक की जान, बिना लाइसेंस बाइक देना पड़ा भारी; पिता-पुत्र दोनों पहुंचे जेल

दुर्ग सत्र न्यायालय में सड़क हादसे के मामले में पिता-पुत्र को सजा
दुर्ग कोर्ट ने सड़क हादसे में युवक की मौत के मामले में बाइक चालक और उसके पिता को दोषी ठहराया।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में सड़क हादसे में एक युवक की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में सत्र न्यायालय ने पिता-पुत्र दोनों को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने बाइक चला रहे मोहित कुमार बघेल को 5 साल की सश्रम जेल और उसके पिता मोहन लाल बघेल को 3 महीने की साधारण जेल की सजा सुनाई है। पिता की गलती यह थी कि उन्होंने बिना ड्राइविंग लाइसेंस के अपने बेटे को बाइक चलाने के लिए दी थी।

यह हादसा 4 अगस्त 2025 की रात करीब 8:30 बजे सुपेला थाना क्षेत्र के स्मृतिनगर चौकी अंतर्गत एक स्कूल के पास हुआ था। बाइक चला रहे मोहित कुमार बघेल ने तेज रफ्तार और लापरवाही से एक्टिवा को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में एक्टिवा चालक शादान अली की मौत हो गई थी, जबकि उनके साथ पीछे बैठे उत्तम पांडेय गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

4 अगस्त 2025 को कैसे हुआ था हादसा?

जानकारी के मुताबिक, मोहित कुमार बघेल बाइक (CG 07 CW-2768) चला रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक ने एक्टिवा (CG 19 A-2771) को टक्कर मार दी। हादसे के बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई और स्मृतिनगर चौकी में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुलिस जांच में सामने आया कि बाइक चला रहे मोहित के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद उनके पिता मोहन लाल बघेल ने उन्हें बाइक चलाने की अनुमति दी थी। जांच के दौरान हादसे के लिए पिता की जिम्मेदारी भी सामने आई।

जांच के बाद दोनों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई

पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद बाइक चालक मोहित कुमार बघेल और उनके पिता मोहन लाल बघेल के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट पेश की। मामले की सुनवाई के बाद दुर्ग सत्र न्यायालय ने 31 अक्टूबर 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

कोर्ट के फैसले के अनुसार, मोहित कुमार बघेल को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मोटरयान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत जेल और जुर्माने की सजा दी गई। वहीं, उनके पिता को बिना लाइसेंस बेटे को वाहन चलाने देने के मामले में दोषी पाया गया।

बाइक चालक मोहित कुमार बघेल को किन धाराओं में मिली सजा?
19 वर्षीय मोहित कुमार बघेल को भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (2) के तहत 5 साल की सश्रम जेल और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

इसके अलावा, BNS की धारा 110 (2) के तहत 3 साल की सश्रम जेल और 1,000 रुपये जुर्माना लगाया गया है।

मोटरयान अधिनियम की धारा 184 के तहत 10 महीने की साधारण जेल और 3,000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। वहीं, धारा 3/181 के तहत 3 महीने की साधारण जेल और 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया है।

पिता मोहन लाल बघेल को किस मामले में हुई जेल?

54 वर्षीय मोहन लाल बघेल को मोटरयान अधिनियम की धारा 5/180 के तहत दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने उन्हें 3 महीने की साधारण जेल और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

आदेश के अनुसार, यदि मोहन लाल बघेल जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें 7 दिन की अतिरिक्त साधारण जेल भुगतनी होगी।

दोनों आरोपी कहां के रहने वाले हैं?

मामले में दोषी ठहराए गए मोहित कुमार बघेल और उनके पिता मोहन लाल बघेल वार्ड क्रमांक 21, भाटापारा कुरुद, चौकी जामुल क्षेत्र के निवासी हैं।

इस फैसले में सड़क हादसे के लिए बाइक चालक की जिम्मेदारी के साथ-साथ नाबालिग नहीं, बल्कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाले बेटे को वाहन चलाने देने के मामले में उसके पिता की कानूनी जिम्मेदारी भी सामने आई है।

CG Janvani Team

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