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| दुर्ग की अदालत ने शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में आरोपी को 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। |
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में शादी का भरोसा देकर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने और बाद में विवाह से इनकार करने के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) अवध किशोर की अदालत ने भिलाई निवासी योगेश कुमार साहू (33) को 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह फैसला 2 नवंबर 2026 को सुनाया गया। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर माना कि आरोपी ने महिला को शादी का भरोसा देकर विश्वास में लिया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जबकि उसका विवाह करने का इरादा नहीं था।
बुआ के घर आने-जाने के दौरान हुई थी पहचान
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, भिलाई निवासी योगेश कुमार साहू की बुआ महिला के घर किराए पर रहती थीं। इसी वजह से योगेश का वहां आना-जाना था और इसी दौरान उसकी महिला से पहचान हुई।
बाद में आरोपी ने अपने फुफेरे भाई के माध्यम से महिला का मोबाइल नंबर लिया। दोनों के बीच फोन और मैसेज पर बातचीत शुरू हो गई। महिला ने उसे अपने पहले तलाक के बारे में भी बताया था।
इसके बावजूद योगेश ने महिला से प्यार और शादी करने की बात कही। वह अपने माता-पिता को लेकर शादी की चर्चा करने आने का भरोसा देता था। होली के अवसर पर वह महिला के घर भी गया और उसके परिवार के साथ त्योहार मनाया।
शादी की बात करने के बहाने घर पहुंचा आरोपी
मामले के अनुसार, 24 मार्च 2025 को योगेश ने महिला को फोन कर बताया कि वह शादी की बात करने उसके घर आ रहा है। दोपहर करीब 2:30 बजे वह वहां पहुंचा। उस समय महिला घर में अकेली थी।
महिला ने अदालत में बताया कि उसने शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करते हुए कहा था कि शादी के बाद ही ऐसा होगा। इसके बावजूद आरोपी ने विवाह का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए।
इसके बाद योगेश ने जल्द ही अपने परिवार को लेकर आने की बात कही और वहां से चला गया।
मोबाइल बंद कर दूसरी युवती से रिश्ता तय करने पहुंचा
महिला के बयान के मुताबिक, घटना के बाद उसी दिन शाम को आरोपी ने अपना मोबाइल बंद कर लिया। कई बार फोन करने के बावजूद उससे संपर्क नहीं हो पाया।
इसके बाद महिला आरोपी के भिलाई स्थित घर पहुंची। वहां उसे जानकारी मिली कि योगेश दूसरी युवती से शादी का रिश्ता तय करने के लिए खुरसुनी गांव गया है।
महिला अपनी बहन के साथ खुरसुनी पहुंची और दूसरी युवती के परिवार को योगेश के साथ अपने संबंधों के बारे में बताया। इसके बाद परिवार ने आरोपी को बुलाकर पूछताछ की।
इस दौरान योगेश ने महिला के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की। इसके बाद दूसरी युवती के परिवार ने शादी का रिश्ता तोड़ दिया। हालांकि, आरोपी ने महिला से भी विवाह करने से इनकार कर दिया।
26 अप्रैल 2025 को दर्ज कराई शिकायत
आरोपी के शादी से इनकार करने के बाद महिला ने 26 अप्रैल 2025 को दुर्ग कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने योगेश कुमार साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद प्रकरण अदालत में पहुंचा और सुनवाई शुरू हुई।
कोर्ट में संबंध स्वीकार, शादी के वादे से इनकार
सुनवाई के दौरान आरोपी ने महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने की बात स्वीकार की, लेकिन शादी का झूठा भरोसा देने के आरोप से इनकार किया। उसका कहना था कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे।
बचाव पक्ष ने महिला की शिक्षा, दोनों के बीच पहले से बातचीत और घटना के दिन महिला के घर अकेले होने की जानकारी आरोपी को होने जैसे तथ्यों का उल्लेख किया।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने महिला, उसकी मां और बहन के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराने की मांग की।
मोबाइल बंद करना और दूसरी जगह रिश्ता तय करना बना अहम आधार
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी और महिला के बीच पहले से पहचान और बातचीत थी, लेकिन इससे पहले दोनों के बीच शारीरिक संबंध होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया।
महिला ने अपने बयान में बताया था कि आरोपी ने शादी का भरोसा देकर संबंध बनाए और उसी दिन मोबाइल बंद कर संपर्क खत्म कर लिया। अदालत ने महिला की मां और बहन के बयानों को भी महत्वपूर्ण माना।
आरोपी ने अपने बयान में मोबाइल बंद करने और दूसरी जगह शादी का रिश्ता तय करने जाने की बात स्वीकार की थी। अदालत के मुताबिक, महिला का बयान प्रतिपरीक्षण के दौरान अखंडित रहा और उसके कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि आरोपी के बयान से भी हुई।
इन परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी का शुरू से ही महिला से शादी करने का इरादा नहीं था। शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले को अदालत ने BNS की धारा 69 के तहत अपराध माना।
7 साल का सश्रम कारावास, 1 हजार रुपये जुर्माना
अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) अवध किशोर ने 2 नवंबर 2026 को योगेश कुमार साहू को 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने आरोपी पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर उसे 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
इसके अलावा, अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग को पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत क्षतिपूर्ति दिलाने की अनुशंसा की है। आरोपी को सजा वारंट के साथ केंद्रीय जेल दुर्ग भेजने का आदेश भी दिया गया है।
