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| नई मूल्यांकन व्यवस्था में सालभर के प्रदर्शन को अंतिम रिजल्ट में महत्व दिया जाएगा। |
स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली से 11वीं कक्षा तक की मूल्यांकन व्यवस्था में बदलाव को मंजूरी दी है। विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को पूरे शैक्षणिक सत्र में पढ़ाई के लिए लगातार तैयार रखना और साल के अंत में परीक्षा के दबाव को कम करना है।
स्कूल शिक्षा विभाग की उप सचिव नीलम टोप्पो ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया है। कक्षा 1 से 8 तक नई व्यवस्था को लागू कराने की जिम्मेदारी लोक शिक्षण संचालनालय यानी DPI को दी गई है और इसके लिए आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
कक्षा 9वीं और 11वीं के मामले में व्यवस्था को माध्यमिक स्तर पर लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE), रायपुर को अलग से प्रस्ताव भेजा जा रहा है। इसका उद्देश्य बोर्ड के नियमों में नई मूल्यांकन व्यवस्था को विधिवत शामिल करना है।
नई व्यवस्था के तहत कक्षा 1 से 4, 6वीं और 7वीं में त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक परीक्षा के अंकों को अलग-अलग वेटेज दिया गया है। यहां त्रैमासिक परीक्षा के 20 प्रतिशत, छमाही परीक्षा के 20 प्रतिशत और वार्षिक परीक्षा के 60 प्रतिशत अंक अंतिम परिणाम में शामिल होंगे।
इसका मतलब है कि इन कक्षाओं के छात्रों के फाइनल रिजल्ट का 40 प्रतिशत हिस्सा साल के दौरान होने वाली त्रैमासिक और छमाही परीक्षाओं से तय होगा, जबकि 60 प्रतिशत हिस्सा वार्षिक परीक्षा से आएगा।
कक्षा 5वीं और 8वीं के लिए मूल्यांकन का पैटर्न अलग रखा गया है। इन कक्षाओं में त्रैमासिक परीक्षा के अंक सीधे अंतिम परिणाम में नहीं जोड़े जाएंगे। छमाही परीक्षा के 30 प्रतिशत और वार्षिक परीक्षा के 70 प्रतिशत अंक अंतिम रिजल्ट में शामिल किए जाएंगे।
इस व्यवस्था में कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों के लिए छमाही परीक्षा महत्वपूर्ण हो जाएगी, क्योंकि उसके प्रदर्शन का 30 प्रतिशत हिस्सा फाइनल रिजल्ट को प्रभावित करेगा।
कक्षा 9वीं और 11वीं के लिए भी 30-70 का वेटेज निर्धारित किया गया है। इन कक्षाओं में छमाही परीक्षा के 30 प्रतिशत और वार्षिक परीक्षा के 70 प्रतिशत अंक अंतिम परिणाम में शामिल किए जाएंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि पूरे सत्र में मूल्यांकन से छात्रों में नियमित पढ़ाई की आदत विकसित करने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था में अंतिम परीक्षा पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय सालभर के प्रदर्शन को भी महत्व दिया जाएगा।
वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. एसके शर्मा ने इस बदलाव को रटने की प्रवृत्ति कम करने और छात्रों की वास्तविक समझ को बढ़ावा देने वाला बताया है। उनके अनुसार, अंकों के विभाजन से साल के अंत में परीक्षा का दबाव कम हो सकता है और छात्रों में निरंतर प्रदर्शन की आदत विकसित हो सकती है।
नई व्यवस्था के बाद छात्रों के लिए केवल अंतिम परीक्षा की तैयारी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। अलग-अलग कक्षाओं के लिए तय वेटेज के अनुसार पूरे शैक्षणिक सत्र में प्रदर्शन का असर अंतिम मार्कशीट पर दिखाई देगा।
