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| दुर्ग जिले में सड़क हादसों और भारी वाहनों की पार्किंग का मुद्दा |
पिछले पांच दिनों में 3 अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत हुई है। इससे पहले 3 सितंबर को कोसनाला टोल प्लाजा के पास नेशनल हाईवे पर रेलवे कर्मचारी रविशंकर भारती (56) की मौत हुई थी। 6 सितंबर को सुपेला थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की टक्कर में दो युवकों की जान गई थी।
12 सितंबर की रात उरला बाईपास पर एक बाइक सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से टकरा गई। कादंबरी नगर निवासी योगेश कुमार साहू (33) कोटनी से दुर्ग लौट रहे थे। बाईपास टोल प्लाजा के पास उनकी बाइक खड़े ट्रेलर से टकराई। गंभीर रूप से घायल योगेश को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस जांच के अनुसार ट्रेलर मुख्य सड़क पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना खड़ा था। इसके बाद मोहन नगर पुलिस ने ट्रेलर चालक के खिलाफ धारा 106 (1) बीएनएस और Motor Vehicle Act के तहत मामला दर्ज किया।
15 सितंबर को झीट-मोतीपुर क्षेत्र में दो अलग-अलग सड़क हादसे हुए। एक मामले में बाइक के सामने अचानक गाय आने के बाद टक्कर हुई, जिसमें बाइक चालक और गाय की मौत हो गई। उसी दिन मोतीपुर में एक बाइक सड़क किनारे लगी फेंसिंग से टकरा गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि दो लोग घायल हुए।
भारी वाहनों की सड़क किनारे पार्किंग का मुद्दा इससे पहले भी गंभीर हादसों से जुड़ा रहा है। 16 जुलाई को कुम्हारी क्षेत्र में National Highway पर सड़क किनारे खड़े ऑक्सीजन सिलेंडर लदे ट्रैक्टर से स्कूटी टकरा गई थी। हादसे में चार लोगों की मौत हुई और एक बच्चा घायल हुआ।
जेवरा-सिरसा, नंदिनी रोड, हथखोज, ट्रांसपोर्ट नगर-सिकोला और National Highway के किनारे भारी वाहनों की बेतरतीब पार्किंग की स्थिति सामने आती रही है। इन क्षेत्रों में ट्रकों और दूसरे मालवाहक वाहनों की आवाजाही अधिक होने के कारण सड़क किनारे खड़े वाहनों से सामान्य यातायात प्रभावित होता है।
जेवरा-सिरसा मार्ग पर कई जगह ट्रक सड़क किनारे खड़े किए जाने से सड़क की उपलब्ध जगह कम हो जाती है। ऐसे में दूसरे वाहनों को खड़े ट्रकों को पार करने के लिए लेन बदलनी पड़ती है।
छावनी थाना क्षेत्र के नंदिनी रोड पर भी भारी वाहनों की पार्किंग की समस्या बताई गई है। औद्योगिक क्षेत्र से आने-जाने वाले ट्रकों की संख्या अधिक होने के कारण सड़क पर पार्किंग का दबाव बना रहता है।
हथखोज में औद्योगिक गतिविधियों के चलते भारी वाहनों की आवाजाही ज्यादा है। सड़क किनारे खड़े ट्रकों से यातायात प्रभावित होने के साथ रात में बिना रिफ्लेक्टर या पार्किंग लाइट के खड़े वाहन दुर्घटना का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
ट्रांसपोर्ट नगर और सिकोला क्षेत्र में मालवाहक वाहनों की आवाजाही तथा लोडिंग-अनलोडिंग के कारण सड़क पर दबाव रहता है। National Highway पर वाहनों की गति अधिक होने की स्थिति में सड़क किनारे खड़े ट्रक या ट्रेलर सामने आने पर खतरा बढ़ सकता है।
सड़क पर घूमते मवेशी भी हादसों से जुड़े एक अन्य कारण के रूप में सामने आए हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े कई मार्गों पर मवेशियों के अचानक सड़क पर आने से वाहन चालक उन्हें बचाने का प्रयास करते हैं, जिसके दौरान बाइक और कार का नियंत्रण बिगड़ने से दुर्घटना हो सकती है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में 2026 के पहले आठ महीनों में सड़क हादसों में मौतों की संख्या कम हुई है। जनवरी से अगस्त 2025 के दौरान 247 लोगों की मौत हुई थी, जबकि इसी अवधि में 2026 में 178 लोगों की जान गई। यानी इस अवधि में 69 मौतों की कमी दर्ज की गई।
महीनेवार आंकड़ों में भी यह अंतर दिखाई देता है। जनवरी 2025 में 47 मौतों के मुकाबले जनवरी 2026 में 35 मौतें हुईं। फरवरी में यह आंकड़ा 30 से घटकर 23, मार्च में 37 से 29, अप्रैल में 40 से 22, मई में 23 से 19, जून में 27 से 15, जुलाई में 21 से 20 और अगस्त में 22 से घटकर 15 रहा।
पुलिस के अनुसार हेलमेट और सीट बेल्ट की चेकिंग, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई तथा ब्लैक स्पॉट और हादसे वाले स्थानों पर निगरानी जैसे कदमों के कारण सड़क हादसों में कमी आई है।
हालांकि सितंबर में सामने आए हादसों और भारी वाहनों की पार्किंग तथा सड़क पर मवेशियों से जुड़े मामलों के कारण सड़क सुरक्षा को लेकर चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस महीने अब तक सड़क हादसों में 6 लोगों की मौत हो चुकी है।
