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| दुर्ग जिला अस्पताल में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित 88 बच्चों के लिए इंसुलिन निडिल की नियमित जरूरत है। |
जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित 88 बच्चे पंजीकृत हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन बच्चों को मौजूदा इलाज व्यवस्था के तहत दिन में चार बार इंसुलिन लगाना पड़ता है। ऐसे में निडिल की जरूरत रोजाना बनी रहती है।
एक बच्चे के लिए महीने में करीब 120 निडिल की आवश्यकता पड़ सकती है। 88 बच्चों के हिसाब से अस्पताल को हर महीने लगभग 10,560 निडिल की जरूरत होती है। सालाना जरूरत करीब 1.26 लाख निडिल तक पहुंचती है। विभागीय स्तर पर भी करीब 1 लाख 26 हजार 500 निडिल की आवश्यकता बताई गई है।
इसके मुकाबले अस्पताल में फिलहाल करीब 525 निडिल उपलब्ध होने की जानकारी है। इंसुलिन और इंसुलिन पेन मेडिसिन स्टोर में मौजूद हैं, लेकिन निडिल की कमी नियमित इंसुलिन देने की व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।
एक बच्चे को रोज चार निडिल की जरूरत
चार बार इंसुलिन लगाने की स्थिति में एक बच्चे को रोजाना चार निडिल की जरूरत पड़ सकती है। इस हिसाब से महीने में करीब 120 निडिल की आवश्यकता होती है। अस्पताल से निडिल उपलब्ध नहीं होने पर परिवारों को इसे बाजार से खरीदना पड़ सकता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार बाजार में 10 निडिल का पैकेट करीब 50 रुपये में मिलता है। इस हिसाब से एक बच्चे के परिवार को महीने में लगभग 600 रुपये और सालभर में करीब 7,200 रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है।
करीब एक साल पहले बनी थी खरीद की योजना
निडिल की कमी को देखते हुए करीब एक साल पहले स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में निडिल खरीदने की योजना बनाई गई थी। हालांकि अब तक सीमित मात्रा में ही खरीद हो सकी है।
इसी वजह से जरूरत के मुताबिक निडिल उपलब्ध नहीं हो पा रही है। विभाग स्थानीय स्तर पर खरीद के साथ छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन से नियमित आपूर्ति शुरू होने का इंतजार कर रहा है।
टाइप-1 डायबिटीज में लगातार निडिल की जरूरत
टाइप-1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन बनना बहुत कम या बंद हो जाता है, इसलिए बच्चों को बाहर से इंसुलिन देना पड़ता है। पंजीकृत बच्चों के लिए दिन में कई बार इंसुलिन की जरूरत होने के कारण निडिल भी नियमित रूप से चाहिए।
88 बच्चों की संख्या को देखते हुए निडिल की आपूर्ति में देरी होने पर परिवारों को इसे बाजार से खरीदना पड़ सकता है। इससे इलाज से जुड़ा अतिरिक्त खर्च परिवारों पर आ सकता है।
सिविल सर्जन ने बताई व्यवस्था
दुर्ग जिला अस्पताल के सिविल सर्जन आशीष कुमार मिंज ने बताया कि जिला अस्पताल में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित 88 बच्चे चिन्हित हैं। निडिल की आवश्यकता को देखते हुए इसका ऑर्डर किया गया है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन से नियमित आपूर्ति शुरू होने तक स्थानीय स्तर पर निडिल खरीदकर बच्चों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
