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| भिलाई में DSP की शिकायत पर सुपेला थाना पुलिस द्वारा दर्ज FIR का मामला |
मामला स्कार्पियो N वाहन क्रमांक CG 05/AP 5000 से जुड़ी शिकायत से शुरू हुआ था। कंपनी के अधिकृत अधिकारी सतनाम सिंह ने 13 अक्टूबर 2025 को जामुल थाने में शिकायत की थी कि वाहन DSP ने वापस नहीं किया है। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच की और DSP का बयान दर्ज किया।
जांच के दौरान वाहन के मूल मालिक अंकित सिंह ने भी 7 नवंबर 2025 को शिकायत दी। पुलिस जांच में वाहन को लेकर कंपनी और अंकित सिंह के बीच लेनदेन का विवाद सामने आया। जामुल थाना पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद मामले में कोई अपराध नहीं पाया।
पुलिस ने अपने निष्कर्ष की जानकारी सतनाम सिंह को 20 फरवरी 2026 और अंकित सिंह को 21 फरवरी 2026 को दी। इसके बाद भी इसी घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग स्तर पर शिकायतें किए जाने का आरोप है।
DSP ने आरोप लगाया कि सतनाम सिंह, विभूति भूषण बाबू और श्रीराम गुप्ता ने आपस में मिलीभगत कर उनके खिलाफ लगातार झूठी, भ्रामक और तथ्यहीन शिकायतें कीं। संबंधित शिकायत की जांच के बाद सुपेला थाना पुलिस ने तीनों के खिलाफ FIR दर्ज की।
मामला पहले थाने पहुंचा और कार्रवाई नहीं होने के बाद कोर्ट तक गया। DSP की ओर से दिए गए न्यायालयीन आवेदन के अनुसार, जामुल पुलिस की पहले की जांच के बावजूद 27 मई 2026 को एसपी, एएसपी और थाना जामुल में शिकायत की गई। इसके बाद 14 जुलाई 2026 को थाना सुपेला में भी शिकायत की गई।
DSP ने आरोप लगाया कि इन शिकायतों में पहले की पुलिस जांच और उसके निष्कर्ष से जुड़े तथ्यों को छिपाकर उनके खिलाफ आपराधिक आरोप लगाए गए। उन्होंने 29 मई को DGP और SP तथा 6 जुलाई को मुख्यमंत्री के ऑनलाइन पोर्टल पर भी शिकायत की थी।
आवेदन के अनुसार, 17 और 21 जुलाई को थाना सुपेला में शिकायत दिए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद DSP ने न्यायालय का रुख किया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दुर्ग भूपेश कुमार बसंत ने 11 सितंबर 2026 को दस्तावेजों के अवलोकन के बाद कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मिथ्या सूचना देने, लोक सेवक के काम में बाधा डालने, झूठी शिकायत और साक्ष्य तैयार करने, नुकसान पहुंचाने के इरादे से झूठा अपराध लगाने, छल और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े अपराध प्रथम दृष्टया बनते हैं।
कोर्ट ने धारा 175 (3) BNSS के तहत आवेदन स्वीकार करते हुए थाना प्रभारी सुपेला को तीनों आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 217, 221, 229, 248, 318, 356 और 61 के तहत FIR दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया।
अब पुलिस शिकायतों, पहले हुई जांच, वाहन से जुड़े दस्तावेज और मामले से संबंधित अन्य साक्ष्यों की जांच करेगी। FIR दर्ज होने के बाद मामले में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की प्रक्रिया चलेगी।
