![]() |
| भिलाई शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी मामले में छावनी पुलिस की कार्रवाई |
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता अभिषेक जैन करीब 10 साल से यतेंद्र सिंह डहरिया को जानते थे। शिकायत में बताया गया है कि यतेंद्र खुद को शेयर मार्केटिंग और गोल्ड लोन का कारोबारी बताता था और यूनिक इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंशियल सर्विसेज तथा एन वाई इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के नाम से कारोबार करने की बात कहता था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, मार्च 2024 में यतेंद्र के कहने पर उनकी पत्नी निकिता जैन के बैंक खाते से 13 लाख रुपए दिए गए। इसके अलावा 2.50 लाख रुपए उनके पिता अशोक जैन के जरिए दिए गए। शिकायत में आरोप है कि यह रकम शेयर बाजार में निवेश और सुरक्षित रखने के नाम पर ली गई थी।
अभिषेक जैन ने यह भी आरोप लगाया कि यतेंद्र ने खुद को मोतीलाल ओसवाल का सब-ब्रोकर या एजेंट बताया था। उसने निकिता जैन के नाम पर डीमैट खाता खुलवाने और उसी के जरिए शेयर ट्रेडिंग करने का भरोसा दिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, मार्च 2026 में जांच करने पर उन्हें पता चला कि यतेंद्र संबंधित कंपनी का मान्यता प्राप्त सब-ब्रोकर या एजेंट नहीं था।
शिकायत के अनुसार, रकम वापस मांगने पर यतेंद्र ने एकमुश्त 18 लाख रुपए लौटाने का भरोसा दिया। बाद में उसने दावा किया कि अभिषेक और उनके पिता की रकम से खरीदे गए शेयर उसके डीमैट खाते में हैं।
अभिषेक के मुताबिक, 8 अप्रैल 2026 को यतेंद्र ने बताया कि उसका डीमैट खाता निष्क्रिय होने के कारण शेयर उनकी पत्नी के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए हैं। इस दावे के समर्थन में उसने CDSL के नाम से शेयर ट्रांसफर की रसीद और अन्य दस्तावेज दिए।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बाद में दस्तावेजों की जांच कराने पर वे फर्जी पाए गए। अभिषेक के अनुसार, उन्होंने जेरोधा और CDSL से संपर्क किया, जहां कथित तौर पर किसी शेयर ट्रांसफर की पुष्टि नहीं हुई।
रकम वापस करने को लेकर मई 2026 के अंतिम सप्ताह में यतेंद्र ने 3 लाख रुपए लौटाए। इसके बाद 1 जून को 15 लाख रुपए के दो चेक दिए गए। शिकायत के मुताबिक, इनमें 10 लाख रुपए का चेक 4 जून और 5 लाख रुपए का चेक 11 जून की तारीख का था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि यतेंद्र ने 2 जून को ही संबंधित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का खाता बंद करा दिया था। इसके चलते दोनों चेक अनादरित हो गए।
अभिषेक के अनुसार, 10 जून को हुई अंतिम बातचीत में 11 जून को पूरी रकम देने की बात कही गई थी। हालांकि, अगले दिन यतेंद्र का मोबाइल बंद मिला और उसके घर व कार्यालय पर ताला लगा था। बाद में उसके भिलाई से चले जाने की जानकारी मिलने की बात शिकायत में कही गई है।
मामले में शेयर निवेश के अलावा गोल्ड लोन से जुड़े आभूषणों को लेकर भी शिकायत की गई है। अभिषेक ने अपने परिचित विक्की सिंह संधू, विश्वजीत सिकदर और माधव तांडी के आभूषणों का उल्लेख किया है।
शिकायत के अनुसार, गोल्ड लोन के लिए यतेंद्र के पास गिरवी रखे गए करीब 12 ग्राम के ओडिशा डिजाइन के झुमके, 4.5 ग्राम की सोने की अंगूठी और करीब 3.8 ग्राम का सोने का कंगन कथित तौर पर अन्यत्र बेच दिया गया।
छावनी पुलिस ने शिकायत के आधार पर BNS की धारा 318(4) और 340(2) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर यतेंद्र सिंह डहरिया उर्फ शिबू की पहचान की गई और उसे बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी मूल रूप से समकृष्णनगर, मोपका, चौकी मोपका, थाना सरकंडा, जिला बिलासपुर का निवासी है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। मामले में आगे की विवेचना जारी है।
