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| रायपुर-बिलासपुर हाईवे के 114 किलोमीटर लंबे कंक्रीट हिस्से पर करीब 700 करोड़ रुपये से डामर की परत चढ़ाने की तैयारी है। |
छत्तीसगढ़ के रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे पर सड़क की खराब होती स्थिति को सुधारने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) नई योजना पर काम कर रहा है। करीब 1,706 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 114 किलोमीटर लंबे कंक्रीट हाईवे पर अब लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च कर डामर की परत चढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए आगामी वित्तीय वर्ष से पहले टेंडर जारी करने की योजना है।
इस हाईवे के निर्माण के कुछ ही वर्षों के भीतर कंक्रीट के पैनलों में खराबी आने लगी थी। रायपुर से सिमगा के बीच अब तक करीब 10 हजार पैनल बदले जा चुके हैं, जबकि 1,100 अन्य पैनलों को बदलने का काम चल रहा है। ऐसे में सड़क की मौजूदा सतह पर डामर बिछाने की योजना ने मरम्मत की प्रभावशीलता और स्थायी समाधान को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
कंक्रीट सड़क पर कैसे चढ़ाई जाएगी डामर की परत?
NHAI की योजना के मुताबिक, मौजूदा कंक्रीट सड़क के ऊपर पहले ग्लास ग्रिड बिछाया जाएगा। इसके बाद करीब 50 मिलीमीटर मोटी डामर की परत चढ़ाई जाएगी। इस तकनीक से सड़क की सतह बेहतर होने और कंक्रीट पैनलों के जोड़ से गुजरते समय वाहनों को लगने वाले झटके कम होने की उम्मीद है।
हालांकि, इस काम की सफलता पुराने कंक्रीट पैनलों की स्थिति और दरारों के उपचार पर भी निर्भर करेगी। यदि मौजूदा दरारों की समस्या को ठीक से दूर नहीं किया गया, तो उनके निशान नई डामर की परत पर दोबारा उभर सकते हैं।
निर्माण के कुछ साल बाद ही खराब होने लगे पैनल
रायपुर-बिलासपुर हाईवे के चौड़ीकरण का काम वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। रायपुर से सिमगा तक के हिस्से का ठेका पुंज एलॉयड कंपनी को करीब 806 करोड़ रुपये में दिया गया था। इस हिस्से का निर्माण 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य था।
सिमगा से सारागांव तक सड़क निर्माण के लिए एलएंडटी को करीब 500 करोड़ रुपये का ठेका मिला था। वहीं, सारागांव से बिलासपुर तक के हिस्से का काम दिलीप बिल्डकॉन को लगभग 400 करोड़ रुपये में सौंपा गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सड़क निर्माण का काम 2018 में पूरा हुआ था। निर्माण कंपनियों को चार साल तक सड़क की देखरेख करनी थी।
सड़क के पैनल खराब होने के बाद मरम्मत का काम लगातार जारी रहा। रायपुर-सिमगा खंड में करीब 10 हजार पैनल बदले जा चुके हैं और अब लगभग 1,100 अन्य पैनलों को बदलने की प्रक्रिया चल रही है। यह काम पुरानी निर्माण कंपनियों द्वारा किया जा रहा है।
बार-बार पैनल बदलने के बावजूद सड़क पर नई डामर की परत चढ़ाने की योजना यह सवाल उठाती है कि मौजूदा कंक्रीट सतह की मरम्मत से समस्या कितनी दूर होगी और नई परत कितने समय तक टिक पाएगी।
हाईवे इंजीनियर ने बताई तकनीकी चुनौतियां
हाईवे इंजीनियर समर पाटनी के अनुसार, कंक्रीट सड़क पर डामर की परत चढ़ाने से सफर अधिक आरामदायक हो सकता है। इससे पैनलों के जोड़ों पर लगने वाले झटके और टायरों से होने वाला शोर कम होने की संभावना है।
हालांकि, डामर बिछाने से पहले सड़क की डिजाइन और तकनीकी स्थिति की जांच जरूरी है। पुराने कंक्रीट पैनलों में मौजूद दरारों का सही उपचार नहीं होने पर वे नई परत पर दोबारा दिखाई दे सकती हैं।
सड़क की ऊंचाई बढ़ने से पुलों, अंडरपास और जल निकासी व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए नई परत बिछाने की योजना में इन पहलुओं का तकनीकी आकलन महत्वपूर्ण होगा।
हाईवे को सिक्सलेन और एक्सेस कंट्रोल बनाने की तैयारी
रायपुर-बिलासपुर हाईवे को सिक्सलेन करने के साथ एक्सेस कंट्रोल व्यवस्था लागू करने की भी तैयारी है। इसके तहत वाहनों को निर्धारित स्थानों से ही हाईवे पर प्रवेश करने और बाहर निकलने की अनुमति होगी।
दोनों ओर सर्विस रोड बनाने का प्रस्ताव भी है। इसका उद्देश्य स्थानीय यातायात और लंबी दूरी के वाहनों को अलग-अलग रखना है, जिससे मुख्य हाईवे पर अचानक वाहनों के आने की समस्या कम हो सके।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सिक्सलेन विस्तार, सर्विस रोड और एक्सेस कंट्रोल व्यवस्था के काम की विस्तृत समयसीमा नहीं दी गई है।
मवेशियों को रोकने के लिए फेंसिंग की पहल
हाईवे पर मवेशियों के प्रवेश को रोकने के लिए NHAI ने सिमगा-बिलासपुर खंड के संवेदनशील स्थानों पर करीब सात किलोमीटर लंबी बांस की फेंसिंग लगाने की पहल की थी। इसका उद्देश्य मवेशियों को मुख्य सड़क पर आने से रोकना था।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल के बावजूद मवेशियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगने की स्थिति स्पष्ट नहीं है और बांस की फेंसिंग भी दिखाई नहीं देती।
हाईवे पर सोलर ब्लिंकर, रिफ्लेक्टिव स्टड, चेतावनी संकेतक, क्रैश बैरियर और ट्रैफिक इम्पैक्ट एटेन्यूएटर जैसे सुरक्षा उपाय भी लगाए गए हैं। इनका उद्देश्य सड़क पर दुर्घटनाओं का जोखिम कम करना है। ये उपाय कंक्रीट के खराब पैनलों की मरम्मत का विकल्प नहीं हैं।
तकनीकी सर्वे और मरम्मत के काम भी जारी
NHAI ने सड़क की स्थिति का आकलन करने के लिए कंसल्टेंट टीम से निरीक्षण और तकनीकी सर्वे कराया था। जनवरी 2026 में हाईकोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेज के अनुसार, रायपुर-बिलासपुर मार्ग का सर्वे कर खराब पैनलों की पहचान की गई थी।
इसके अलावा, सड़क की देखरेख के लिए पैचवर्क, नालियों की सफाई और रोड मार्किंग जैसे काम भी कराए गए। खराब कंक्रीट पैनलों को हटाकर नए पैनल डालने का काम भी जारी है।
इन प्रयासों के बावजूद अब सड़क पर डामर की नई परत चढ़ाने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में परियोजना का अगला महत्वपूर्ण चरण तकनीकी जांच, टेंडर प्रक्रिया और प्रस्तावित काम के क्रियान्वयन से जुड़ा होगा।
NHAI ने क्या बताया?
NHAI रायपुर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर दिग्विजय सिंह के मुताबिक, रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे की कंक्रीट सड़क पर डामर की परत चढ़ाई जाएगी। इसके लिए आगामी वित्तीय वर्ष से पहले टेंडर जारी करने की तैयारी है।
फिलहाल, प्रस्तावित काम की विस्तृत समयसीमा और निर्माण शुरू होने की निश्चित तारीख उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। करीब 700 करोड़ रुपये की इस योजना से सड़क की सतह में कितना सुधार होगा, यह तकनीकी कार्ययोजना और वास्तविक क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
