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| दुर्ग में हरेराम प्रसाद कुशवाहा के खिलाफ जिला बदर आदेश जारी |
जिला बदर आदेश के तहत 1 अक्टूबर 2026 से एक साल तक हरेराम प्रसाद दुर्ग के अलावा रायपुर, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बालोद और धमतरी जिले की सीमा में बिना जिला दंडाधिकारी की अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकेगा।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक हरेराम प्रसाद का नाम वर्ष 1999 से अलग-अलग मामलों में सामने आता रहा है। उसके खिलाफ करीब 18 मामले दर्ज होने की बात कही गई है। इनमें मारपीट, बलवा, रास्ता रोककर डराने-धमकाने, हत्या के प्रयास, चोरी और जुआ से जुड़े मामले शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार अलग-अलग समय पर उसके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई, लेकिन इसके बाद भी उसकी गतिविधियों में बदलाव नहीं आया। पुलिस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इलाके में उसके प्रभाव के कारण लोग शिकायत करने या गवाही देने से डरते थे। पुलिस ने उसकी गतिविधियों को इलाके की शांति और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया था।
कलेक्टर की कार्रवाई से पहले पुलिस की रिपोर्ट, पुराने थानों के रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की गई। इसके बाद जिला दंडाधिकारी ने राज्य सुरक्षा अधिनियम की संबंधित धारा के तहत जिला बदर का आदेश जारी किया।
वर्ष 2025 में भी हरेराम प्रसाद का नाम एक मामले में सामने आया था। सुपेला पुलिस ने बांग्लादेशी दंपती को संरक्षण देने के मामले में उसे गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक हरेराम करीब पांच साल से ज्योति और उसके पति रासेल शेख के संपर्क में था।
पुलिस के अनुसार हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वर्ष 2020 में हरेराम ने दोनों के लिए किराए का मकान दिलाया था। इसके बाद करीब पांच साल तक वह दंपती से हर महीने 3 हजार रुपये किराया लेता रहा। पुलिस के मुताबिक जिस मकान से दंपती को पकड़ा गया था, वह भी हरेराम के कब्जे में बताया गया है।
इस मामले में सुपेला थाने में अपराध क्रमांक 571/2025 दर्ज किया गया था। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर यह मामला भी हरेराम के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई के संदर्भ में सामने आया है।
अब आदेश के अनुसार हरेराम प्रसाद को निर्धारित अवधि में दुर्ग जिला छोड़ना होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से एक साल तक दुर्ग समेत कुल सात अन्य जिलों में प्रवेश के लिए संबंधित जिला दंडाधिकारी की अनुमति आवश्यक होगी।
