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| दुर्ग जिला अस्पताल में एक्स-रे फिल्म की कमी का मुद्दा उठाते हुए AIYF ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। |
AIYF दुर्ग शहर अध्यक्ष शमीम कुरैशी ने ज्ञापन के माध्यम से अस्पताल के एक्स-रे विभाग में फिल्म उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा उठाया। संगठन का कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं मिलने से गरीबों, मजदूरों, किसानों और अन्य जरूरतमंद मरीजों को निजी केंद्रों में जांच कराने के लिए जाना पड़ रहा है।
दुर्ग के साथ आसपास के जिलों के मरीज भी प्रभावित
ज्ञापन में बताया गया है कि जिला अस्पताल दुर्ग में दुर्ग-भिलाई, धमधा, पाटन और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव और कबीरधाम जिलों से भी लोग इलाज कराने आते हैं।
ऐसे में एक्स-रे फिल्म की अनुपलब्धता से केवल स्थानीय मरीज ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। संगठन ने इस स्थिति को आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक बताया है, क्योंकि निजी केंद्रों में जांच कराने से उनके खर्च बढ़ सकते हैं।
सरकारी अस्पताल में जरूरी जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग
AIYF ने सवाल उठाया है कि जब मरीज सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचते हैं, तो उन्हें जरूरी जांच के लिए निजी संस्थानों पर निर्भर क्यों होना पड़े। संगठन के अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में आवश्यक सुविधाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि मरीजों को समय पर और सुलभ उपचार मिल सके।
संगठन ने इस समस्या के समाधान के लिए जिला अस्पताल में एक्स-रे फिल्म की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जांच सुविधा जल्द बहाल करने की मांग की है। ज्ञापन में संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है।
कलेक्टर से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई का आग्रह
AIYF दुर्ग जिला इकाई ने जिला कलेक्टर से अनुरोध किया है कि अस्पताल में एक्स-रे फिल्म की कमी को दूर करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाए जाएं। संगठन का कहना है कि सुविधा बहाल होने से मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों पर जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला दुर्ग को भी सौंपी गई है। AIYF ने मांग की है कि जिला अस्पताल में जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता और विशेष रूप से गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को राहत मिल सके।
