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| दुर्ग जिले में 65 वर्षीय महिला से दुष्कर्म और मारपीट के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत का फैसला। |
यह घटना 2 फरवरी 2025 की रात की है। अभियोजन के मुताबिक, महिला चुनाव प्रचार से लौटने के बाद अपने घर में सो रही थी। रात करीब 12 से 12:30 बजे के बीच दरवाजा खटखटाने पर उसने दरवाजा खोला, जिसके बाद एक व्यक्ति उसे धक्का देकर घर में घुस आया। आरोप था कि उसने महिला के साथ दुष्कर्म और मारपीट की।
महिला ने खुद को छुड़ाकर लाइट जलाई, जिसके बाद आरोपी की पहचान हुई। अभियोजन के अनुसार, महिला के चिल्लाने पर आरोपी ने उसे चुप कराने के लिए हाथ-मुक्कों से मारपीट की और शोर सुनकर वहां से भाग गया। घटना के बाद पीड़िता ने पड़ोस में रहने वाली महिला को इसकी जानकारी दी।
3 फरवरी को दर्ज हुई थी FIR
पीड़िता की शिकायत पर 3 फरवरी 2025 को धमधा थाने में अपराध क्रमांक 17/2025 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64, 332 (बी) और 115 (2) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पीड़िता का बयान दर्ज किया गया और उसकी निशानदेही पर घटनास्थल का नक्शा तैयार कराया गया। 4 फरवरी 2025 को पीड़िता और आरोपी का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। इसी दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र अदालत में पेश किया।
सुनवाई के दौरान 11 गवाहों के बयान दर्ज
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। इनमें पीड़िता, उसकी बेटी, पड़ोस में रहने वाली महिला, अन्य गवाह, पटवारी, चिकित्सक और पुलिस अधिकारी शामिल थे।
आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और खुद को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने की दलील दी। हालांकि, सुनवाई के बाद अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित माने और दोषसिद्धि के साथ सजा सुनाई।
तीन धाराओं के तहत सुनाई गई सजा
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 के तहत दुष्कर्म के अपराध में आरोपी को 20 साल के सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा दी। जुर्माना जमा नहीं करने पर उसे 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
धारा 332 (बी) के तहत आरोपी को सात साल के सश्रम कारावास और 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर सात दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 115 (2) के तहत एक साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई।
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि तीनों सजाएं एक साथ चलेंगी। सजा के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने न्यूनतम दंड देने की मांग की थी, जबकि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के लिए कठोर सजा का आग्रह किया।
पीड़िता को आर्थिक सहायता देने की अनुशंसा
फैसले में अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध घर में अकेली रहने वाली महिलाओं, खासकर बुजुर्गों के बीच असुरक्षा और भय का माहौल पैदा करते हैं।
अदालत ने पीड़िता को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मदद देने की अनुशंसा की। इसके लिए फैसले की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने का निर्देश दिया गया, ताकि पीड़िता को योजना के तहत सहायता उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सके।
