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| उतई पॉक्सो केस में विशेष न्यायालय पॉक्सो, दुर्ग ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। |
आरोपी को आजीवन कारावास के साथ अलग-अलग धाराओं में 7 वर्ष, 10 वर्ष और 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। इसके अलावा कुल 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह मामला उतई थाना क्षेत्र के कुंआंपारा और बंजारीपारा से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार 10 अप्रैल 2026 को करीब साढ़े चार से पांच वर्ष की बच्ची से संबंधित लैंगिक अपराध की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद उतई थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धनेंश्वर साहू उर्फ जनता को 11 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया था। विवेचना के दौरान जरूरी साक्ष्य जुटाए गए और 25 अप्रैल 2026 को न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया गया।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय पॉक्सो, दुर्ग में हुई। न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार अभियोजन भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो अधिनियम 2012 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चला।
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 109, 238 और 65(2), पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ड) के साथ धारा 6 तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत कार्रवाई की गई थी। उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
न्यायालय के सजा आदेश के अनुसार अलग-अलग धाराओं में निर्धारित सजा सुनाई गई है। कुल 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
मामले की विवेचना नगर पुलिस अधीक्षक नेवई भारती मरकाम ने की। पुलिस कार्रवाई में निरीक्षक महेश ध्रुव, तत्कालीन थाना प्रभारी उतई, उप निरीक्षक प्रमोद सिन्हा तथा थाना उतई और रक्षित केंद्र दुर्ग के पुलिसकर्मियों की भूमिका रही। न्यायालय में मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक रूपवती तेलीदार ने की।
दुर्ग पुलिस के अनुसार मामले में विवेचना पूरी कर साक्ष्यों के साथ अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया, जिसके बाद विशेष पॉक्सो न्यायालय में सुनवाई हुई और फैसला सामने आया।
फैसले के बाद दुर्ग पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि बच्चों से जुड़े किसी भी लैंगिक अपराध, शोषण या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए।
पुलिस ने संवेदनशील मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान और निजता सुरक्षित रखने की अपील भी की है। साथ ही मामले से संबंधित संवेदनशील जानकारी को बिना आवश्यकता सार्वजनिक नहीं करने की सलाह दी गई है।
यह मामला उतई थाना क्षेत्र के कुंआंपारा और बंजारीपारा से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार 10 अप्रैल 2026 को करीब साढ़े चार से पांच वर्ष की बच्ची से संबंधित लैंगिक अपराध की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद उतई थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धनेंश्वर साहू उर्फ जनता को 11 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया था। विवेचना के दौरान जरूरी साक्ष्य जुटाए गए और 25 अप्रैल 2026 को न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया गया।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय पॉक्सो, दुर्ग में हुई। न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार अभियोजन भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो अधिनियम 2012 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चला।
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 109, 238 और 65(2), पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ड) के साथ धारा 6 तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत कार्रवाई की गई थी। उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
न्यायालय के सजा आदेश के अनुसार अलग-अलग धाराओं में निर्धारित सजा सुनाई गई है। कुल 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
मामले की विवेचना नगर पुलिस अधीक्षक नेवई भारती मरकाम ने की। पुलिस कार्रवाई में निरीक्षक महेश ध्रुव, तत्कालीन थाना प्रभारी उतई, उप निरीक्षक प्रमोद सिन्हा तथा थाना उतई और रक्षित केंद्र दुर्ग के पुलिसकर्मियों की भूमिका रही। न्यायालय में मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक रूपवती तेलीदार ने की।
दुर्ग पुलिस के अनुसार मामले में विवेचना पूरी कर साक्ष्यों के साथ अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया, जिसके बाद विशेष पॉक्सो न्यायालय में सुनवाई हुई और फैसला सामने आया।
फैसले के बाद दुर्ग पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि बच्चों से जुड़े किसी भी लैंगिक अपराध, शोषण या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए।
पुलिस ने संवेदनशील मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान और निजता सुरक्षित रखने की अपील भी की है। साथ ही मामले से संबंधित संवेदनशील जानकारी को बिना आवश्यकता सार्वजनिक नहीं करने की सलाह दी गई है।
