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| बलौदाबाजार के सिमगा थाना क्षेत्र के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। |
विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी के अनुसार, मामले की शुरुआत एक नाबालिग के पिता की शिकायत के बाद हुई थी। सिमगा पुलिस ने गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने नाबालिग को नागपुर से बरामद किया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जांच में सामने आया कि आरोपी उसे शादी का झांसा देकर नागपुर ले गया था। आरोप के अनुसार, वहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया, जिसके बाद वह गर्भवती हुई और एक बच्ची को जन्म दिया। बाद में आरोपी ने उसे छोड़ दिया।
अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2024 में आरोपी ने पीड़िता की छोटी बहन को भी अपने साथ ले जाकर अलग स्थान पर रहने लगा। पुलिस की कार्रवाई के दौरान दोनों बहनों को नागपुर से बरामद किया गया और सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िताओं से संबंधित स्कूल के दाखिल-खारिज रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज जब्त किए। इसके साथ ही गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जांच पूरी होने के बाद दोनों मामलों में आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया। इसके आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार जायसवाल ने आरोपी को दोनों प्रकरणों में दोषी माना और आजीवन कारावास तथा अर्थदंड की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने आदेश में दोनों मामलों में दी गई सजाओं को एक साथ प्रभावी करने का निर्देश दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, न्यायालय के फैसले के साथ दोनों प्रकरणों की सुनवाई का यह चरण पूरा हुआ।
