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| हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में कुलपति के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति पहुंची। |
कुलपति से मांगे गए दस्तावेज तय समय-सीमा में उपलब्ध नहीं होने के बाद समिति के सीधे विश्वविद्यालय पहुंचने से प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई। जांच समिति को अपनी रिपोर्ट 30 दिन के भीतर राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका को सौंपनी है।
कुलपति के खिलाफ शिकायत विधायक एवं छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ललित चंद्राकर ने कुलाधिपति के समक्ष की थी। इसके बाद राज्यपाल ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की।
समिति की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल कर रहे हैं। राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना और उप सचिव निधि साहू समिति के सदस्य हैं, जबकि अवर सचिव अनुभव शर्मा को संयोजक बनाया गया है।
शिकायतों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए राज्यपाल सचिवालय ने पहले 24 अगस्त तक समय दिया था। कुलपति की ओर से समय बढ़ाने का अनुरोध किए जाने के बाद यह अवधि 31 अगस्त तक बढ़ाई गई।
इसके बाद अंतिम अवसर देते हुए संबंधित नस्तियां, नोटशीट और अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। पत्र में स्पष्ट किया गया था कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। अंतिम समय-सीमा बीतने के बाद जांच समिति विश्वविद्यालय पहुंची।
शिकायतों में एमबीए, एमसीए और पीजीडीबीएम सहित आठ नए पाठ्यक्रमों के निरीक्षण के लिए एआईसीटीई और आरसीआई की प्रक्रिया शासन की पूर्व अनुमति के बिना कराने का आरोप शामिल है। इसके अलावा एक संस्था को अलग स्वरूप में प्रस्तुत करने का भी आरोप लगाया गया है।
पांच विषयों के विभाग शुरू होने और विद्यार्थियों के प्रवेश से पहले 15 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बड़े वित्तीय और प्रशासनिक मामलों को कार्यपरिषद के सामने नहीं रखने की शिकायत भी जांच के दायरे में है।
इसके साथ ही बिना विधिवत निविदा 40 लाख रुपये की 380 पुस्तकों की खरीद का आरोप भी लगाया गया है। इन सभी शिकायतों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच समिति पड़ताल कर रही है।
इसी बीच बहुचर्चित उत्तरपुस्तिका खरीद मामले में कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन को जांच समिति के अभिमत से राहत मिली है। समिति ने कहा है कि छत्तीसगढ़ संवाद से उत्तरपुस्तिकाओं के मुद्रण की प्रक्रिया शासन के निर्देशों के तहत पूरी की गई थी।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर स्थित केंद्रीय पल्प एवं पेपर अनुसंधान संस्थान ने 50,000 पूरक उत्तरपुस्तिकाओं की जांच की थी। इसमें गुणवत्ता की कमी पाए जाने के बाद विश्वविद्यालय ने भुगतान रोक दिया और संबंधित पक्ष से स्पष्टीकरण मांगा था।
समिति के अनुसार सत्र 2025-26 के लिए मुद्रित उत्तरपुस्तिकाओं का कोई भुगतान नहीं किया गया है। इसी आधार पर समिति ने माना कि इस मामले में आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं बनता।
जांच समिति के अभिमत में कम गुणवत्ता वाली उत्तरपुस्तिकाओं को अधिक मूल्य पर खरीदने से जुड़ी शिकायत को पूरी तरह निराधार पाया गया है। इस मामले में कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन को जांच समिति से बड़ी राहत मिली है।
जांच समिति के विश्वविद्यालय पहुंचने पर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के पीआरओ दिग्विजय साहू ने कहा कि प्रो. विजय कुमार गोयल के नेतृत्व में टीम आई थी और सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
अब कुलपति के खिलाफ अन्य शिकायतों से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद समिति अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपेगी। फिलहाल जांच की प्रक्रिया विश्वविद्यालय स्तर पर आगे बढ़ रही है।
