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| दुर्ग जिला अस्पताल मामले में गुरदीप सिंह भाटिया ने स्वतंत्र जांच और प्रभावित परिवार को राहत देने की मांग की। |
भाटिया के अनुसार, परिजनों ने आरोप लगाया है कि प्रसव के दौरान नवजात शिशु के दाहिने हाथ की हड्डी टूट गई। परिजनों का यह भी कहना है कि नवजात की गंभीर स्थिति के कारण उसे पिछले 10 दिनों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। वहीं, प्रसूता ने अस्पताल के स्टाफ पर कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और चिकित्सकीय अभिलेखों के आधार पर तथ्यों का पता लगाने की मांग की गई है।
निजी अस्पताल में उपचार से परिवार पर आर्थिक दबाव
गुरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि नवजात की गंभीर स्थिति के कारण परिवार को निजी अस्पताल में उपचार कराना पड़ रहा है। इससे परिवार आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
भाटिया का कहना है कि इस मामले में प्रसव के दौरान तैनात डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। साथ ही, प्रसूता के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए।
स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग
दक्षिण ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने जिला कलेक्टर से मामले की जांच के लिए स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है। कमेटी के अनुसार, जांच के दौरान प्रसव से संबंधित सभी उपलब्ध चिकित्सकीय अभिलेखों, उपचार विवरण, रेफरल दस्तावेजों और ड्यूटी रजिस्टर की पड़ताल की जानी चाहिए।
इसके अलावा, अस्पताल में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है, ताकि जांच के दौरान संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जा सके। कांग्रेस कमेटी ने जांच के लिए समय-सीमा तय करने और आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई करने की मांग रखी है।
नवजात के उपचार और परिवार को आर्थिक सहायता की मांग
गुरदीप सिंह भाटिया ने प्रशासन से नवजात की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का स्वतंत्र विशेषज्ञों से आकलन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार बच्चे के लिए उच्चस्तरीय उपचार की व्यवस्था की जानी चाहिए।
इसके साथ ही, प्रभावित परिवार को शासन की प्रचलित योजनाओं और निर्धारित पात्रता के अनुसार आर्थिक सहायता तथा उपचार संबंधी राहत उपलब्ध कराने की मांग की गई है। कमेटी ने प्रसूता के साथ कथित अमानवीय व्यवहार के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने पर जोर दिया है।
भाटिया ने कहा, "यह मामला किसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि एक नवजात के जीवन, एक मां के सम्मान और एक पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का है।"
उन्होंने शासकीय अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, संवेदनशील व्यवहार और चिकित्सकीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, जिला प्रशासन से दुर्ग जिला अस्पताल की प्रसव व्यवस्था, कर्मचारियों के व्यवहार और मरीजों की सुरक्षा की नियमित निगरानी करने की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
कांग्रेसजनों ने भी उठाई जांच की मांग
इस अवसर पर अयूब खान, कन्या धीमर, अश्विनी झगड़े, भूपेंद्र सेन, नंदा राउत, भूपेंद्र वर्मा, के.डी. देवांगन, प्रकाश जोशी, बीना देशमुख, ललित उके, शहंशाह आलम, आशीष देशमुख, सनी साहू, दीपक साहू और गुन राउत उपस्थित रहे या उन्होंने समर्थन दिया।
यह जानकारी दक्षिण ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, दुर्ग के अध्यक्ष गुरदीप सिंह भाटिया की ओर से जारी की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में कांग्रेस कमेटी ने स्वतंत्र जांच, नवजात के उपचार और परिवार को नियमानुसार राहत देने की मांग की है। आरोपों की जांच के निष्कर्ष और जिला प्रशासन की कार्रवाई की जानकारी इस बयान में उपलब्ध नहीं कराई गई है।
