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| दुर्ग जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत के मामले की जांच होगी। |
परिजनों का आरोप है कि सुबह करीब 6 बजे प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद उन्होंने अस्पताल के स्टाफ को इसकी जानकारी दी। करीब 7 बजे महिला को लेबर रूम ले जाया गया, लेकिन उनके मुताबिक डॉक्टर के आने का इंतजार करने को कहा गया। दोपहर करीब 12 बजे महिला को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया और लगभग आधे घंटे बाद नवजात की मौत की जानकारी परिवार को दी गई।
परिजनों के आरोपों के मुताबिक, सबीना को 3 सितंबर को दोपहर करीब 12 से 1 बजे के बीच जिला अस्पताल लाया गया था। भर्ती के बाद शाम करीब 4 बजे हुई जांच में डॉक्टरों ने बच्चे के गले में दो नाल फंसी होने की जानकारी दी थी। परिवार का कहना है कि उस समय सी-सेक्शन की बात भी कही गई थी।
परिजनों के अनुसार, इसके बाद उन्हें बताया गया कि अगले दिन जन्माष्टमी की छुट्टी है और ऑपरेशन बाद में किया जाएगा। उनका कहना है कि छुट्टी के दिन सी-सेक्शन की बात दोबारा सामने आई, लेकिन महिला के खाना खा लेने के कारण उस समय ऑपरेशन नहीं किया गया। इसके बाद रात में उन्हें कुछ भी खाने से रोक दिया गया।
परिजन बताते हैं कि रात करीब 9 बजे दोबारा जांच की गई और सुबह ऑपरेशन किए जाने की बात कही गई। इसके बाद परिवार सुबह तक डॉक्टर के आने का इंतजार करता रहा।
5 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे सबीना को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार के मुताबिक, करीब 7 बजे उन्हें लेबर रूम ले जाया गया। मृत नवजात के पिता आशिक अली का आरोप है कि उन्होंने महिला की बढ़ती पीड़ा के बारे में डॉक्टर और स्टाफ को बताया, लेकिन उन्हें कहा गया कि डॉक्टर सुबह 9 बजे आएंगे और जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
परिजनों का कहना है कि उस समय तक बच्चे की धड़कन सामान्य थी। इसके बावजूद उनका आरोप है कि तत्काल सी-सेक्शन को लेकर उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
सुबह डॉक्टरों के आने के बाद महिला की जांच की गई। परिजनों के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे उन्हें ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। परिवार को उम्मीद थी कि अब सी-सेक्शन किया जाएगा, लेकिन करीब 12.30 बजे उन्हें नवजात की मौत की जानकारी दी गई।
परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला को सी-सेक्शन के लिए ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया था, लेकिन अंत में सामान्य प्रसव कराया गया। आशिक अली ने अस्पताल में समय पर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध होने पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
सबीना की बुआ सबा सिद्दीकी ने भी आरोप लगाया कि सुबह महिला की हालत खराब होने के बाद परिवार लगातार जांच कराने की मांग करता रहा, लेकिन डॉक्टर के नहीं आने की बात कहकर उन्हें इंतजार कराया गया। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई।
इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को जांच का विषय बताया है। सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज के मुताबिक, मामले की जांच के लिए डॉक्टरों की टीम बनाई जाएगी, जो यह देखेगी कि इलाज के दौरान किस समय क्या निर्णय लिया गया और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।
सिविल सर्जन के अनुसार, महिला दो दिन से अस्पताल में भर्ती थीं और यह उनकी तीसरी डिलीवरी थी। उनकी पिछली दोनों डिलीवरी सामान्य हुई थीं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि 5 सितंबर की सुबह करीब 9 बजे तक बच्चे की धड़कन सामान्य थी, जिसके बाद प्रसव के दौरान नवजात की मौत हुई।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में यह भी सामने आया है कि महिला को ऑपरेशन के लिए ले जाया गया था, लेकिन उन्होंने खाना खा लिया था। सिविल सर्जन ने कहा कि खाना खाने के तुरंत बाद ऑपरेशन करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। महिला की पिछली दो डिलीवरी सामान्य होने के कारण डॉक्टर सामान्य प्रसव की संभावना को ध्यान में रखकर इलाज कर रहे थे।
डॉ. मिंज के मुताबिक, सी-सेक्शन करना है या नहीं, इसका निर्णय मरीज की स्थिति के आधार पर स्त्री रोग विशेषज्ञ करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में स्टाफ की कमी है, लेकिन सी-सेक्शन के लिए जरूरी पूरी टीम उपलब्ध रहती है और मरीज की प्राथमिकता के अनुसार स्टाफ लगाया जाता है।
फिलहाल नवजात की मौत की वास्तविक वजह और इलाज के दौरान किसी तरह की चूक हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। जांच समिति घटनाक्रम के अलग-अलग चरणों की समीक्षा करेगी और उसके बाद ही जिम्मेदारी तय होने की स्थिति सामने आएगी।
