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| रायपुर के पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में साइबर जागृति अभियान के कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थी |
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय और रायपुर के अलग-अलग महाविद्यालयों के 500 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान साइबर ठगी के बदलते तरीकों, डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव और ठगी होने के बाद तत्काल उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा हुई।
‘साइबर संकल्प’ के तहत तैयार किए गए प्रत्येक वीडियो मॉड्यूल की अवधि करीब 5 से 6 मिनट है। इन्हें सरल भाषा में तैयार किया गया है, ताकि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों को साइबर अपराधों के नए तरीकों और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी आसानी से मिल सके।
कार्यक्रम में विजय शर्मा ने कहा कि Banking, Shopping, Education, Business और सरकारी सेवाओं समेत कई काम अब Online हो रहे हैं। Digital सुविधाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं, इसलिए Digital Security के प्रति जागरूकता जरूरी है।
विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उन्होंने साइबर जागरूकता को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा स्वयं साइबर अपराधों से बचने के तरीके सीखें और अपने परिवार, दोस्तों तथा आसपास के लोगों को भी नए प्रकार की ऑनलाइन ठगी के बारे में जागरूक करें।
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| रायपुर के पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में साइबर जागृति अभियान के कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थी |
उन्होंने खास तौर पर गांव-गांव तक साइबर जागरूकता पहुंचाने की जरूरत बताई। विद्यार्थियों से बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों को Fake Calls, OTP से जुड़ी धोखाधड़ी, फर्जी Links, Social Media से संबंधित ठगी और ‘Digital Arrest’ जैसे मामलों में सतर्क रहने के बारे में जानकारी देने का आह्वान किया गया।
साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर संपर्क करने की अपील भी कार्यक्रम में की गई। विजय शर्मा ने कहा कि Online Fraud के बाद घबराने या देर करने के बजाय तुरंत Cyber Helpline Number 1930 पर सूचना देनी चाहिए। उनके अनुसार शुरुआती समय महत्वपूर्ण होता है और समय पर जानकारी मिलने से पुलिस को ठगी की राशि रोकने तथा उसे पीड़ित तक वापस पहुंचाने की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में साइबर धोखाधड़ी के एक पीड़ित डॉ. सेन ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एक करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी में उन्हें ‘Digital Arrest’ के नाम पर अपराधियों ने अपने जाल में फंसाया था। समय रहते पुलिस से संपर्क करने के कारण Golden Hour में कार्रवाई हुई और 60 लाख रुपये की ठगी की राशि वापस प्राप्त हो सकी।
उनके अनुभव के जरिए विद्यार्थियों को साइबर ठगी के बाद तत्काल पुलिस को सूचना देने के महत्व के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में यह संदेश भी सामने रखा गया कि ठगी के बाद शुरुआती समय में की गई कार्रवाई महत्वपूर्ण हो सकती है।
कार्यक्रम में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए साइबर क्राइम वालंटियर पहल की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C की ओर से साइबर अपराधों की रोकथाम में जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से यह पहल संचालित की जा रही है।
विद्यार्थियों से भी साइबर क्राइम वालंटियर के रूप में जागरूकता गतिविधियों में सहभागी बनने की अपील की गई। इसका उद्देश्य नागरिकों को स्वयं, अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के प्रयासों में जोड़ना है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के बदलते स्वरूप के प्रति सावधान रहने और Online Safety से जुड़े जरूरी मानकों का पालन करने की सलाह दी। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त गौरव मंडल ने अलग-अलग प्रकार के साइबर अपराधों, उनके तरीकों और बचाव के उपायों की जानकारी दी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा कि तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से बचने के लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों का जागरूक होना जरूरी है। कार्यक्रम में पुलिस और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने भी साइबर सुरक्षा को लेकर विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) अमित कुमार, पुलिस आयुक्त रायपुर डॉ. संजीव शुक्ला, पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) प्रशांत अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रायपुर अमित तुकाराम कांबले, कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला और कुलसचिव शैलेंद्र पटेल सहित पुलिस एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
पुलिस आयुक्त रायपुर डॉ. संजीव शुक्ला ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विजय शर्मा, विश्वविद्यालय के कुलपति, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर जागृति अभियान 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। अभियान के तहत प्रदेशवासियों को साइबर अपराधों के अलग-अलग स्वरूप, उनसे बचाव के तरीकों और साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

