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| बिलासपुर रीजन में बिजली उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी 1 सितंबर से शुरू की गई। |
बिलासपुर रीजन के अंतर्गत बिलासपुर, जीपीएम, मुंगेली और कोरबा जिले के करीब 8 लाख 57 हजार 800 बिजली उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी की जाएगी। कंपनी के मुताबिक, प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपभोक्ताओं का सही डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी और यह जानकारी भी स्पष्ट होगी कि बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल वास्तविक और वैध उपभोक्ता कर रहा है या नहीं।
ई-केवाईसी के दौरान बिजली कनेक्शन से जुड़े उपभोक्ता की पहचान का सत्यापन किया जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि कनेक्शन जिस व्यक्ति के नाम पर दर्ज है, वही सही उपभोक्ता है या नहीं। साथ ही वर्तमान में कनेक्शन का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की जानकारी भी रिकॉर्ड में सामने आएगी।
उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी कराने के लिए तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प 'मोर बिजली मोबाइल ऐप' है, जिसके जरिए उपभोक्ता खुद ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। दूसरा विकल्प नजदीकी वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में जाकर अधिकृत कर्मचारियों की मदद से ई-केवाईसी कराना है।
तीसरे विकल्प के तहत मीटर रीडर उपभोक्ता के घर पहुंचकर मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस तरह उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा के अनुसार प्रक्रिया पूरी करने का विकल्प मिलेगा।
ई-केवाईसी में आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए पहचान का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए ओटीपी, फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यदि बिजली कनेक्शन और आधार कार्ड में उपभोक्ता का नाम अलग-अलग है, तो पहले बिजली कनेक्शन में नाम सुधार कराना होगा। केवल नाम में गलती होने की स्थिति में किसी तरह का प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं, यदि मालिकाना हक में बदलाव करना है, तो नियमानुसार शुल्क और जरूरी दस्तावेज देने होंगे।
विद्युत कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है। उपभोक्ताओं से इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि ई-केवाईसी के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें। ई-केवाईसी के लिए केवल अधिकृत माध्यमों का इस्तेमाल करने और किसी संदिग्ध लिंक या अनधिकृत ऑनलाइन माध्यम से प्रक्रिया पूरी नहीं करने की सलाह दी गई है।
