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| 6 साल की बच्ची की हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी चाचा को मृत्युदंड की सजा सुनाई। |
विशेष लोक अभियोजक रुपवर्षा दिल्लीवार के अनुसार, घटना 6 अप्रैल 2025 को रामनवमी के दिन हुई थी। बच्ची पड़ोस में स्थित अपनी बुआ-दादी के घर नवकन्या भोज के लिए गई थी, लेकिन सुबह करीब 10 बजे के बाद वह लापता हो गई।
परिजनों ने बच्ची की तलाश की और बाद में मोहन नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस और परिवार की तलाश के दौरान उसी रात करीब 9 बजे बच्ची का शव पास में खड़ी एक कार में सीटों के बीच छिपा मिला।
मामले की जांच के लिए एएसपी पद्मश्री तंवर और टीआई शिव चंद्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी। जांच में डीएनए रिपोर्ट, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी एफएसएल रिपोर्ट और आरोपी से जुड़े मेमोरेंडम बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में अदालत के सामने रखा गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी घटना से पहले करीब तीन महीने से उसी घर की छत पर बने कमरे में रह रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि घटना वाले दिन बच्ची खेलते हुए छत पर पहुंची थी और रिश्तेदार होने के कारण आरोपी पर भरोसा करती थी।
पुलिस के मेमोरेंडम के मुताबिक, बच्ची की मौत के बाद आरोपी ने शव को पास में खड़ी एक कार में छिपा दिया। जांच में कार के खराब दरवाजे और सामने वाले घर के सीसीटीवी के दिन में बंद रहने की जानकारी भी सामने आई, जिसे पुलिस ने अपनी जांच का हिस्सा बनाया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची की मौत का कारण अत्यधिक क्रूरता के बाद हुआ गहरा सदमा और कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर बताया गया। मामले में वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को अदालत के सामने महत्वपूर्ण आधार के रूप में रखा गया।
विशेष पॉक्सो अदालत ने 163 पन्नों के फैसले में अपराध की गंभीरता पर टिप्पणी की और इसे केवल हत्या का मामला नहीं, बल्कि एक अबोध बच्ची के भरोसे और पारिवारिक रिश्ते से जुड़े विश्वास के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा।
अदालत ने आरोपी को मृत्युदंड के साथ अर्थदंड की सजा भी सुनाई है। साथ ही मृतका के परिजनों को आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की सहायता राशि देने का निर्देश दिया गया है।
आरोपी घटना के दो दिन बाद से ही जेल में बंद है। अब अदालत के इस फैसले के बाद मृत्युदंड की अंतिम पुष्टि बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा की जानी है।
