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| छत्तीसगढ़ में पांच प्रमुख देवी मंदिरों को जोड़कर करीब 1,000 किलोमीटर लंबे धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर के विकास की तैयारी है। |
परियोजना का उद्देश्य मंदिरों तक पहुंच आसान बनाना और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं को बेहतर करना है। इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन से स्थानीय रोजगार, छोटे कारोबार और पर्यटन से जुड़ी सेवाओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
आस्था पथ योजना के लिए बजट में 5 करोड़ रुपये
राज्य सरकार 'छत्तीसगढ़ आस्था पथ (शक्तिपीठ भ्रमण) योजना' शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत श्रद्धालुओं को पांचों शक्तिपीठों के दर्शन कराने की योजना बनाई गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
प्रस्तावित कॉरिडोर में बेहतर सड़क संपर्क, पेयजल, पार्किंग, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और विश्राम स्थलों जैसी सुविधाओं को विकसित करने की योजना है। श्रद्धालुओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
पर्यटन स्थलों पर पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और CCTV जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों को अधिक सुविधाजनक पर्यटन अनुभव उपलब्ध कराना है।
रतनपुर महामाया मंदिर के विकास के लिए 200 करोड़ रुपये की कार्ययोजना
बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर के समग्र विकास के लिए करीब 200 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की PRASHAD योजना के तहत पर्यटन मंत्रालय को भेजा गया है।
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विकास कार्यों के लिए एजेंसी निर्धारित कर काम शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। फिलहाल इस कार्ययोजना को मंजूरी मिलने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
वहीं, डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
मंदिर परिसरों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
शक्तिपीठ परियोजना के तहत मंदिर परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें गार्डन, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की जगह, विश्राम स्थल, हवन-पूजन के लिए स्थान, रेलिंग, पेयजल और सामुदायिक शौचालय शामिल हैं।
इसके अलावा पार्किंग, CCTV और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। जहां जरूरत होगी, वहां रोप-वे जैसी सुविधाओं पर काम करने की योजना है।
विकास कार्यों में स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक वास्तुकला और प्राकृतिक परिवेश को संरक्षित रखने की बात कही गई है। साथ ही, स्थानीय लोगों की भागीदारी से होम स्टे और अन्य पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की योजना है।
इन पांच प्रमुख मंदिरों को परियोजना में किया गया शामिल
डोंगरगढ़ का मां बम्लेश्वरी मंदिर इस धार्मिक सर्किट का प्रमुख हिस्सा होगा। राजनांदगांव जिले में पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्थित मां महामाया मंदिर धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। इस मंदिर का संबंध कलचुरी काल से माना जाता है और यह क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक धरोहरों में शामिल है।
दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर बस्तर की आराध्य देवी को समर्पित है। शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम क्षेत्र में स्थित इस मंदिर की बस्तर दशहरा में भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ में पहाड़ी और जंगलों के बीच स्थित मां बागेश्वरी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं।
वहीं, सक्ती जिले के चंद्रपुर में महानदी के तट पर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर भी इस परियोजना में शामिल है। नदी के किनारे और प्राकृतिक परिवेश में स्थित यह मंदिर धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है।
धार्मिक पर्यटन से रोजगार और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने की योजना
शक्तिपीठ परियोजना का उद्देश्य मंदिरों के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है। इसके जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था में गतिविधियां बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पर्यटन सुविधाओं के विकास से होटल, होम स्टे, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर वास्तविक प्रभाव विकास कार्यों के क्रियान्वयन और पर्यटकों की आवाजाही पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, परियोजना के तहत पांच प्रमुख देवी मंदिरों को जोड़ने वाले धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर की तैयारी की जा रही है। रतनपुर महामाया मंदिर के लिए तैयार कार्ययोजना को पर्यटन मंत्रालय की मंजूरी मिलने और अन्य मंदिरों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद आगे की विकास प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
