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| फर्जी 8वीं की अंकसूची के मामले में वार्ड बॉय को विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्त किया गया। |
मामला तब सामने आया जब तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण को महावीर साहू के प्रमाण पत्र और अंकसूची को लेकर शिकायत मिली। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नियुक्ति के समय जरूरी दस्तावेजों का नियमानुसार सत्यापन नहीं किया गया।
शिकायत के बाद कलेक्टर ने मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने जांच समिति गठित की और महावीर साहू की अंकसूची का संबंधित स्कूल से सत्यापन कराया।
जांच में सामने आया कि नौकरी के लिए लगाई गई साल 2008 की 8वीं कक्षा की अंकसूची में रोल नंबर 26987 दर्ज था। इस पर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला हसौद, विकासखंड जैजैपुर, जिला जांजगीर-चांपा का नाम दर्ज था।
विभाग की ओर से जब अंकसूची का संबंधित स्कूल से सत्यापन कराया गया, तो स्कूल प्रबंधन ने इसे फर्जी बताया। इसके बाद मामले में विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
बताया गया है कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद वार्ड बॉय ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 14 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया।
महावीर साहू को एक महीने का नोटिस दिया गया। निर्धारित विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
इस मामले ने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
सवाल यह है कि नियुक्ति के समय मार्कशीट और दूसरे दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया और फर्जी अंकसूची के आधार पर नियुक्ति होने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई।
जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज के डीन डॉ. जीआर चतुर्वेदी ने कहा कि पूर्व के अधिकारियों को इस संबंध में उचित कार्रवाई करनी थी। उनके मुताबिक, विभागीय जांच में मामले की सच्चाई सामने आई।
डीन ने बताया कि जांच के बाद वार्ड बॉय को नोटिस दिया गया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वसूली समेत अन्य कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से पत्राचार किया जा रहा है।
