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| बिलासपुर-कटनी फोर लेन समेत मंजूर किए गए रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स |
सरकार के अनुसार मंजूर किए गए प्रस्तावों में कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी फोर लेन रेलवे ट्रैक से जुड़े काम शामिल हैं। इन परियोजनाओं को देश के प्रमुख हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है।
कैबिनेट की मंजूरी पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में फैले तीन मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स के लिए है। इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।
इन प्रोजेक्ट्स की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये बताई गई है। इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की तैयारी है।
मंजूर किए गए मल्टी-ट्रैकिंग कार्यों में खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी। इससे रेल आवाजाही को बेहतर तरीके से संचालित करने और व्यस्त मार्गों पर भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही रेलवे की ऑपरेशनल क्षमता और सर्विस की विश्वसनीयता में सुधार का लक्ष्य है।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में 11,000 किलोमीटर लंबे सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर हैं, जिन्हें चार लेन यानी क्वाड्रुपलिंग की दिशा में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई अन्य कॉरिडोर पर भी काम चल रहा है, ताकि आने वाले समय में बढ़ने वाले ट्रैफिक को संभाला जा सके।
इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-मुंबई के बीच का नेटवर्क भी शामिल है। सरकार इन मार्गों की क्षमता बढ़ाने के लिए मल्टी-ट्रैकिंग और क्वाड्रुपलिंग जैसे कार्यों पर जोर दे रही है।
