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| जोरा वार्ड की राशन दुकान में जांच के दौरान चावल के स्टॉक में कमी सामने आई। |
मामला उस समय सामने आया जब खाद्य विभाग ने 29 अक्टूबर 2025 को राशन दुकान का निरीक्षण किया। इस दौरान कई हितग्राहियों ने शिकायत की कि उन्हें अक्टूबर महीने का PDS चावल और शक्कर नहीं मिला है।
जांच के दौरान दुकान में करीब 265 राशन कार्ड मिले। आरोप है कि संचालक ने हितग्राहियों से राशन कार्ड जमा कराए और ई-पॉस मशीन के जरिए उनका biometric verification कराया। इसके बावजूद उन्हें राशन नहीं दिया गया और राशन कार्ड भी वापस नहीं किए गए।
जांच में करीब 250 राशन कार्ड की एंट्री ई-पॉस मशीन में मिली, लेकिन संबंधित हितग्राहियों को चावल नहीं दिया गया था। इसी जांच में 81.07 क्विंटल चावल के गबन की बात सामने आई।
ई-पॉस रिकॉर्ड और दुकान में मौजूद वास्तविक स्टॉक के मिलान के दौरान चावल की कमी का बड़ा अंतर सामने आया। प्रारंभिक जांच में 333.97 क्विंटल चावल कम पाया गया था।
रिकॉर्ड के मुताबिक 12 से 15 अक्टूबर के बीच दुकान में 232.90 क्विंटल चावल पहुंचा था, लेकिन इसकी विधिवत पावती नहीं ली गई थी। जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर और आवश्यक सूचना बोर्ड भी दुकान में नहीं मिले।
कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद खाद्य विभाग ने 4 नवंबर 2025 को दुकान संचालक को निलंबित कर दिया। इसके बाद राशन दुकान को दूसरी संस्था से जोड़ दिया गया।
7 नवंबर को दुकान के हस्तांतरण के लिए दोबारा भौतिक सत्यापन किया गया। इस जांच में चावल की कमी बढ़कर 389.24 क्विंटल पाई गई, जो 778.48 बोरी के बराबर थी।
जांच के अनुसार सरकारी राशन के कथित गबन और धोखाधड़ी से करीब 15.91 लाख रुपए की वित्तीय हानि हुई। खाद्य विभाग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच की और साक्ष्य मिलने के बाद टोपेश्वर साहू को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
मामले में आगे की विवेचना जारी है। उपलब्ध जांच में सामने आई अलग-अलग चरणों की स्टॉक कमी को प्रारंभिक जांच और बाद के भौतिक सत्यापन के निष्कर्ष के रूप में दर्ज किया गया है।
