भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी केस में कारोबारी भास्कर मुदलियार गिरफ्तार

 

भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी मामले में गिरफ्तार कारोबारी भास्कर मुदलियार से जुड़ी पुलिस जांच की सांकेतिक तस्वीर
भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी मामले में पुलिस की जांच लगातार जारी।
भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में सामने आए बहुचर्चित लोहा चोरी मामले में पुलिस ने शनिवार को एक और अहम कार्रवाई की है। जांच के दौरान सामने आई भूमिका के आधार पर रसूखदार कारोबारी भास्कर मुदलियार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ उसके खिलाफ मिले सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

पुलिस के मुताबिक वैशाली नगर निवासी भास्कर मुदलियार की गाड़ियां लंबे समय से भिलाई स्टील प्लांट के भीतर संचालित हो रही थीं। जांच में जुटी टीम को मिले साक्ष्यों के बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद शनिवार को औपचारिक रूप से उसकी गिरफ्तारी कर ली गई।

इस मामले में अब तक जनरल मैनेजर (GM) और असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM) सहित कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार लोहा चोरी से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच लगातार जारी है। जांच के दौरान नए तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनके आधार पर आगे भी अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल लोहा चोरी तक सीमित नहीं है। इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। इसी कारण पुलिस हर पहलू की विस्तार से जांच कर रही है और इस पूरे मामले से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस विभाग के अनुसार जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कुछ और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

भिलाई स्टील प्लांट में लोहा चोरी का यह मामला पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब कारोबारी भास्कर मुदलियार की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस का दावा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और पूरे गिरोह का पर्दाफाश होने तक कार्रवाई जारी रहेगी।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि जनरल मैनेजर (GM) हिमांशु भूषण मलिक और असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM) मनोज कुमार देवांगन कथित तौर पर लोहा चोरी करने वाले गिरोह के संपर्क में थे। जांच के अनुसार दोनों प्लांट के भीतर से गिरोह की मदद कर रहे थे।
जांच में यह भी पता चला कि बीएसपी से बाहर भेजे जाने वाले फ्लू डस्ट में आयरन स्क्रैप मिलाया जाता था। इसके बाद इस स्क्रैप को एके ट्रेडर्स में जमा कराया जाता था।

मामले का खुलासा 26 मई 2026 को हुआ था, जब पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स और हथखोज के प्लॉट नंबर-18 पर छापा मारा था। जांच के दौरान कई हाईवा, ट्रक और अन्य वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री बरामद हुई थी।

छापेमारी के दौरान करीब 250 टन लौह स्क्रैप जब्त किया गया था। इसके अलावा स्क्रैप की ढुलाई और लोडिंग में इस्तेमाल होने वाले कई वाहन, जेसीबी, हाईड्रा और अन्य मशीनें भी जब्त की गई थीं। जब्त किए गए सामान और वाहनों की कुल कीमत करीब 3 करोड़ 22 लाख रुपये आंकी गई थी। इसमें लगभग 90 लाख रुपये का लौह स्क्रैप शामिल था।

फ्लू डस्ट स्टील प्लांट, ब्लास्ट फर्नेस, स्पंज आयरन और अन्य धातु उद्योगों की चिमनी से निकलने वाली महीन धूल होती है। इसमें लौह कण, जिंक, सीसा और अन्य धातुएं मौजूद हो सकती हैं। इसे डस्ट कलेक्टर या बैग फिल्टर की मदद से एकत्र किया जाता है और इसका उल्लेख आमतौर पर स्टील उत्पादन से जुड़े कार्यों में होता है।

वहीं फ्लाई ऐश कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट में कोयला जलने के बाद बनने वाली राख होती है। इसका उपयोग सीमेंट, ईंट, सड़क निर्माण और कंक्रीट तैयार करने में किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से सिलिका, एल्युमिना और कैल्शियम जैसे तत्व पाए जाते हैं।

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